
किसी पागल दीवाने पे जो मर जाओ तो मैं जानूं
किसी कातिल निगाहों में उतर जाओ तो मैं जानूं
हो कहते क्यों ज़माने से की मंडराता तेरे सर पे
भ्रमर के पास खुशबू बन के आ जाओ तो मै जानूं
समंदर मेरे गम का पीके मुसकाओ तो मै जानूं
कभी तो दिल में अपने झांक शरमाओ तो मै जानूं
वतन की सरहदों को पार करने के हुनरमंदों
अगर तुम प्यार की हद पार कर जाओ तो मैं जानूं

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